भागा वाला देखो सोहना चाला आ गया

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॥ पावन पाठ ॥

भागा वाला देखो सोहना चाला आ गया,

नच्दे ने भगत प्यारे जोगी दे,

इक पासे इक पासे ढोल बज्दा,

दूजे पासे लगन जैकारे जोगी दे,

भागा वाला देखो सोहना चाला आ गया,

लाल लाल झंडे उते गोते सोहने जड़ने,

बाबा जी दी फोटो लाके हथा विच फढ़ने,

वेख वेख एहना नू न मन भरदा,

झुल्दे ने झंडे द्वारे जोगी दे,

भागा वाला देखो सोहना चाला आ गया,

सारिया दे आके ही फ़िक्र एथे मुकदे

लान लई चौंकी ने तलाइयाँ रात रुक दे,

ओहदे नाम नाल ही हवावा मेह्कियाँ ठन्डे ठन्डे आउंदे ने हुलारे जोगी दे,

भागा वाला देखो सोहना चाला आ गया,

हर दिल विच बड़ा चा जेहा रेह्न्दा है,

नंगल दा मोहनी गल दिल वाली कहंदा है ,

सच्चे मन नाल जेहड़ा आवे दर ते ओहि है जी मान दा नजारे जोगी दे,

भागा वाला देखो सोहना चाला आ गया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।