किना सोहना लगदा है गुफा उते मोर

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॥ पावन पाठ ॥

सारी दुनिया दे विच आज पै गया है शोर,

वेखो किना सोहना लगदा है गुफा उते मोर,

लगदा है मोर जीवे अरशा दा नूर है,

नाथ दिया रेहमता दा एवी भरपूर है,

पौणाहारी नाल भजि है ऐहडी भी डोर,

वेखो किना सोहना लगदा है गुफा उते मोर,

दियोट सिद्ध गुफा उते वखरा ज़माल है,

पेला पाउँदा मोर करि जांदा ओ कमाल है,

गुफा उते नूर आज दिसदा है होर,

वेखो किना सोहना लगदा है गुफा उते मोर,

पता नी की जोगी जी दे मन विच आई है,

रवि हरिपुरिये न लीला जो दिखाई है,

कहे प्रवेश चढ़ी नाम वाली डोर,

वेखो किना सोहना लगदा है गुफा उते मोर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।