अम्बे माँ ये किरपा आप की मेरे घर में माँ ज्योत जली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अम्बे माँ ये किरपा आप की मेरे घर में माँ ज्योत जली,

कितनी मन में थी चा दर्श की मेरे घर में माँ ज्योत जली,

अम्बे माँ ये किरपा आप की मेरे घर में माँ ज्योत जली

तेरी करुणा की क्या माँ मैं बात करू,

सब के दुखड़े हरे मैं भी विनती करू,

चरणों में शरण मैंने ली मेरे घर में ज्योत जली,

अम्बे माँ ये किरपा आप की मेरे घर में माँ ज्योत जली

सारा परिवार तुझको माँ नमन करे,

तेरी किरपा जो हो झोली सब की भरे,

सारा परिवार तुझको माँ नमन करे,

रेहमतो की माँ बरसात की,मेरे घर में ज्योत जली,

अम्बे माँ ये किरपा आप की मेरे घर में माँ ज्योत जली

क्या निराली छवि मन को निराली लगे,

मैं माँ क्या करू मेरा जी न भरे,

क्या निराली छवि मन को प्यारी लगे देके दर्शन दी ज़िंदगी,

मेरे घर में ज्योत जली,

अम्बे माँ ये किरपा आप की मेरे घर में माँ ज्योत जली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।