सूरत मेरे साई दी सहनु लगदी प्यारी ऐ

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॥ पावन पाठ ॥

सूरत मेरे साई दी सहनु लगदी प्यारी ऐ,

है नाम नशा उसदा चडी नाम खुमारी है

है ज्योत इलाही ओ कण कण विच वास करे,

दे नूर निगाहा नु शीशा मन साफ़ करे,

एहदी चल ता हर पासे कुदरत ओहदी सारी है,

सूरत मेरे साई दी सहनु लगदी प्यारी ऐ,

दुनिया नु तारण ली हर युग विच आ जावे,

हर रंग ओहदा सोहना है भगता नु भाह जाये,

तस्वीर ओहदी वखरी हुंडी हर वारि है,

सूरत मेरे साई दी सहनु लगदी प्यारी ऐ,

गम तार गरीबा दा सिर छतर झुला देवे,

कर रहमत भगता ते तख्ता ते बिठा देवे,

एह रहबर सब दा है सारा जगत बिखारी है,

सूरत मेरे साई दी सहनु लगदी प्यारी ऐ,

की सिफत करा उसदी शब्दा विच आवे,

ना एह कमल बड़ी छोटी गुण लिख भी पावे न,

है पार वयानी तो ओहदी खेड न्यारी है,

सूरत मेरे साई दी सहनु लगदी प्यारी ऐ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।