फरियादी तेरा आया साई तेरी शिरडी में

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

फरियादी तेरा आया साई तेरी शिरडी में,

इक झलक पाने आया बाबा तेरी शिरडी में,

दीदार हो तो जानू स्वीकार हो तो मानु,

विश्वाश मुझको लाया बाबा साई तेरी शिरडी में ,

फरियादी तेरा आया साई तेरी शिरडी में

चरणों में मैं पड़ा हु मुझे साई न भुलाना,

ले के मैं आस आया बाबा तेरी शिरडी में,

फरियादी तेरा आया साई तेरी शिरडी में

दुख्या है जो भी आया तूने गले लगाया,

मन की मुरादे पाया बाबा साई तेरी शिरडी में,

फरियादी तेरा आया साई तेरी शिरडी में

तेरे दर को छोड़ कर के और कहा मैं जाऊ,

सब कुछ यही तो पाया साई तेरी शिरडी में,

फरियादी तेरा आया साई तेरी शिरडी में

भक्त जो शिरडी आते झोली वो भर के जाते,

गुण गान तेरा गाते बाबा साई तेरी शिरडी में,

फरियादी तेरा आया साई तेरी शिरडी में

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।