तेरा मंगल मेरा मंगल सब का मंगल होये रे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तेरा मंगल मेरा मंगल सब का मंगल होये रे,

जिस जन नी जन्म दियां है उसका मंगल होये रे,

तेरा मंगल मेरा मंगल सब का मंगल होये रे,

ताला पोछा और बढ़ाया पिता का मंगल होये रे,

जिस गुरु देव ने धर्म दिया है उसका मंगल होये रे,

इस जग के सब दुखियारे का मी का मंगल होये रे,

जल में थल में और गंगन में सब का मंगल होये रे,

तेरा मंगल मेरा मंगल सब का मंगल होये रे,

तेरा मंगल मेरा मंगल सब का मंगल होये रे,

अंतर मन की गाँठ ये टूटे अंतर निर्मल होये रे,

शुद्ध धर्म धरती पर जागे पाप पराजित होये रे,

इस धरती के तर दिन में कण कण में धर्म समाये रे,

तेरा मंगल मेरा मंगल सब का मंगल होये रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।