शिरडी वाले का जलवा निराला

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॥ पावन पाठ ॥

शिरडी वाले का जलवा निराला,

पार बेडा लगा दे तो जानू,

तेरे दर्शन के देखे है सपने मेरी बिगड़ी बना दे तो जानू,

शिरडी वाले का जलवा निराला,

तुम ही अवतार हो सब के साई,

तुम दया का खजाना हो साई,

तुम ही त्यागी हो तुम ही हो योगी,

जग का तुम ही तराना हो साई,

जय जय कार तुम्हारी है साई हमे अपना बना ले तो जानू,

शिरडी वाले का जलवा निराला,

जग के मेले में खोया हु साई मुझको राह दिखा शिरडी वाले,

पाप का भोज सिर पे है साई,

मुझको मुक्ति दिला शिरडी वाले,

मेरे दिल में तमना है साई मुझे रास्ता दिखा दे तो जानू,

शिरडी वाले का जलवा निराला,

हर गद्दी अब जुबा पे है साई,

नाता दुनिया से तोडा है मैंने ,

आसरा देदो अपनी शरण में,

आज रुख ऐसा मोड़ा है मैंने,

अपने भक्तो को एह मेरे साई तुम दुआ से नवाजो तो मैं जानू,

शिरडी वाले का जलवा निराला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।