कल नु मैं जंगली टूर जाना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन बाबा बालक नाथ भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कल नु मैं जंगली टूर जाना,

मुड न आना फेर नि गल सुन ले माये,

आखा चो हंजू न गेर नि गल सुन ले माये

एमे जोगी छड़ न जावी,

जावी न बिछोड वे तू मुड आ जोगी,

माता रही है तेरी मोड़,

बारहा साला दी आ लै लस्सी ते रोटियां,

सीना मेरा साडेया क्यों गला करे खोटियाँ,

आ ले माये साम्ब ले गावा,

लावी न तू देर नि,

नि गल सुन ले माये मुड के ना आना एथे फेर नि,

पुत्रा वाजो केहड़ा जोगियां छड़ के मैनु न जाए,

और छीन बिछोड़े पा ले मेरे सीने दे विच न लाइ,

पाल तेरियां मिन्ता करदी मिंत करा हाथ जोड़,

तू मुड आ जोगी माता रही है तेरी मोड़

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।