शिरडी वाले साई क्यों दर पे बुलाया न

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॥ पावन पाठ ॥

शिरडी वाले साई क्यों दर पे बुलाया न,

ऐसी क्या भूल हुई चरणों से लगाया न,

सपने में साई आके तूने मुझे जगाया था,

तुझे दर पे भुलाऊ गा ये मुझको बताया था,

जब आँख खुली मेरी मेरा भर आया था,

शिरडी वाले साई क्यों दर पे बुलाया न

लाखो को तार दिया क्या मुझसे भूल हुई,

मेरी बारी आने में इतनी क्यों देर हुई,

शिरडी वाले साई क्यों दर पे बुलाया न

सब को तो लगाया गले मुझे पास बिठाया न,

मेरी भी सुन ले गा मेरी सोच है ये कहती,

साई सब की सुनते है दुनिया ये कहती है,

शिरडी वाले साई क्यों दर पे बुलाया न

हर पल तेरा ध्यान करू तुझे ध्यान नहीं मेरा,

रविचंदर ये कहता साई भगवान् मेरा,

सना भक्त पे कर किरपा शिरडी क्यों भुलाया न,

शिरडी वाले साई क्यों दर पे बुलाया न

साई तेरी किरपा से हर बात कबुल हुई,

उस माफ़ कर देना जो हमसे भूल हुई,

हमसर की बात सुनो इस को भी निभा लेना,

शिरडी वाले साई क्यों दर पे बुलाया न

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।