दुधाधारियां पौनाहारियां

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॥ पावन पाठ ॥

दुधाधारियां पौनाहारियां तूने कैसी अलख जगाई,

वाजा मारे रत्नों माई,

साद केहड़े दा चेला बनया वे किहने तेरे हथ च कम्न्डली फडाई,

कनी मुंद्रा ते हथ विच चिमटा वे बोल किहने गल तेरे सिंगी पाई,

दुधाधारियां पौनाहारियां किथे जा बैठा धुनी लाई,

वाजा मारे रत्नों माई,..........

बाहरा साल दियां रोटियां तू साम्ब रखियाँ मार चिमटा तू लस्सी भी दिखाई,

बाहरा साल गुजारे बाहरा घड़ियाँ दे बदले कहंदा मुकियाँ कर्ज मेरी माई,

दुधाधारियां पौनाहारियां आन गाऊया भी दें दुहाई

वाजा मारे रत्नों माई,..........

मोर दी सवारी चड उड़ गया बाबा इक लांग पुच बड़ेया गुफा विच,

ममता दी मारी रोवे माँ एह विचारी बस तू ही रतनो दे दिल विच,

दुधाधारियां पौनाहारियां सुनी पई तेरी पिंड शाहतलाई ,

वाजा मारे रत्नों माई,..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।