बचेया दियां कर दे सारियां आसा पुरियां माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुन मेहरा वालिये माये तेरे दर ते सवाली आय,

तू जान दी है बचडे दी सब मजबूरियां माँ,

बचेया दियां कर दे सारियां आसा पुरियां माँ,

तेरे मंदिरा दे विच डेरा ला के बह जाना,

दुःख हॉवे या सुख हॉवे हस के सह जाना,

किस कारण रखे तू बचडे तो दूरियां माँ,

बचेया दियां कर दे सारियां आसा पुरियां माँ,

तेरे नाम दे रंग विच हर पल रंगेया रहना हां,

हर साह दे नाल मैं तेरा नाम ही लेना आ,

ऐसा चड़ेया तेरा रंग नाल सबुरियां माँ,

बचेया दियां कर दे सारियां आसा पुरियां माँ,

दुःख दाडे ने हर पासे दिसन हनेरे माँ,

दीपक नु पाये आन दुखा ने घेरे माँ,

तेरे कर्म जेहो हॉवे होवन जग मशुरियां माँ,

बचेया दियां कर दे सारियां आसा पुरियां माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।