गुल्भी रंग बरसे कौन बरसावे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गुल्भी रंग बरसे कौन बरसावे,

संगता नु लगदा भोहड़ा वाला आवे,

गुल्भी रंग बरसे कौन बरसावे,

बाबा दे नाम प्यारा पूजे जी आलम सारा.

मन दर्शन ताहि तरसे कौन तरसावे,

गुल्भी रंग बरसे कौन बरसावे,

खुलैया पेंदा राह देखो दर दा नहीं राह राह देखो,

लंगर महरा वाला बरसे कौन बरसावे,

गुल्भी रंग बरसे कौन बरसावे,

बाबा जी बोहड़ा वाला संगता दा है रखवाला,

ओह संगत जुड़ के बैठी दर ते शिंदर सोमा भेटा गावे,

गुल्भी रंग बरसे कौन बरसावे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।