दाता जग भी मैनु भुलावे कसम मैं आवा नचदा

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे सतगुरु हारा वाले जग विच ने इस दे उजाले

मेरे मुरशद हारा वाले जग विच ने इस दे उजाले,

दाता जग भी मैनु भुलावे कसम मैं आवा नचदा,

दिल में वसाये मैंने आँखों में समाये मैंने दर्शन के सपने,

तू ही तो दाता मेरा भाग्य विध्यता मेरा हम भी है तेरा अपने,

कसम मैं आवा नचदा,

खुशिया बढ़ाये दाता भक्ती लुटाये दाता,

तेरे हाथ डोरा मेरियाँ.

दर्श दिखावे एह नसीबा नु जगावे जिस नु उडीका तेरियां,

कसम मैं आवा नचदा,

शक्ति महान तेरी वखरी है शान तेरी महिमा है दास लिख्दा

सारा संसार तेरी करे जय जय कार गेड चौरासी मिट दा,

कसम मैं आवा नचदा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।