कमली हां मैं सोहने सतगुरु दी सइयो कमली हां

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

कमली हां मैं सोहने सतगुरु दी सइयो कमली हां,

ऐसा रंग मुरशद दा चड़ेया लोक केहन मैनु कलि,

लोका तो दस मैं की लेना होइ गुरा दी चलि,

कमली हां मैं सोहने सतगुरु दी सइयो कमली हां,

मेहरा वाले ने कर्म कमाया कमली कोजी नु चरनी लाया,

गुरु मेरा मुरशद गुरु मेरा साई मैं होइ गुरा दी वंजलि आ,

कमली हां मैं सोहने सतगुरु दी सइयो कमली हां,

सतगुरु मेरे वेहड़े वडिया हर पासे नशा नाम दा चड़ेया,

गुरा दे रंग विच रंग के ऑडियो हो गई आ आज रमली आ,

कमली हां मैं सोहने सतगुरु दी सइयो कमली हां,

मेरिया कितिया लेहरा बेहरा मैं मुरशद दी मंगदी खैरा,

दासन दास मैं गुण की गावा अपने गुरा तो वारि वारि जावा

आज बनी गुरा दी मलंगनी आ,

कमली हां मैं सोहने सतगुरु दी सइयो कमली हां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।