सुख वेले शुकराना दुःख वेले अरदास

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सुख वेले शुकराना दुःख वेले अरदास,

हर वेले तेरा सिमरन गावा मेरे दतेया,

सुख वेले शुकराना दुःख वेले अरदास,

सुख वेले शुकराना करके प्रभु दा शुकर मनाई दा,

दुःख वेले अरदास करके दुःख नु भजाई दा,

मैं नीवा मेरा मुरशद ऊचा मेरे साहिबा,

सुख वेले शुकराना दुःख वेले अरदास,

सुख दुःख धुप छा वरगे ने आउंदे जांदे रेह्न्दे ने,

ना इतरौंदे ना गबराऊँदे जो जन तनु ध्याउंदे ने,

मन नीवा मत ऊंची रखी मेरे साहिबा,

सुख वेले शुकराना दुःख वेले अरदास,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।