जन्मदिवस है मेरे प्रभु का

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आज का दिन ये खुशियों भरा जन्मदिवस है मेरे प्रभु का,

आज वधाईयां गूंज रही है,

जन्म दिवस की आई घडी है ,

मुबारक हो सब को ये सूंदर समा,

जन्मदिवस है मेरे प्रभु का,

युग युग राज करो मेरे मालिक सूंदर सेहत रहे मुबारक,

दासो की मिल के यही है दुआ,

जन्मदिवस है मेरे प्रभु का,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।