मेरे कान्हा कहा तू गया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे कान्हा कहा तू गया,रो रो पुकारे तेरी राधा

तेरे बिना मेरे मोहना मैं हु आधी तू भी आधा,

छोड़ गया क्यों मुझ विरहन को,

ऐसा तू निर्मोही या तन लागे वो तन जाने,

और ना जाने कोई,

आजा रे आजा रे आ,अब तो लौट के आ,

मेरे कान्हा...

प्यार सीखा के मन में वसा के,

भूल गया क्यों मुझको तड़प तड़प के कटे रात दिन,

कैसे बताऊ तुझको आजा रे आजा रे आ,

और न अब तड़फा,

मेरे कान्हा ..........

सावन बरसे नैना तरसे,

फागुन लागे फीका होली दसहरा और दिवाली,

दीप जलाना घी का आजा रे आजा रे आ मुझको भी रंग जा,

मेरे कान्हा ............

श्याम सांवला रूप है तेरा मन का भी तू काला,

चुरा चुरा के माखन खाया दिल पे ढाका डाला,

आजा रे आजा रे आ दीक्षित को समजा,

मेरे कान्हा .............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।