हे मेरे साई शिरडी के

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॥ पावन पाठ ॥

साई साई हे मेरे साई शिरडी के साई मेरा सहारा हो तुम,

तू मेरे मन में तू ही लगन में साई मैं तुझमे हु गुम,

साई साई साई साई हे मेरे साई शिरडी को साई मेरा सहारा हो तुम,

तू मेरे मन में तू ही लगन में साई मैं तुझमे हु गुम,

सारे कष्ट समेटे तू सब की झोली भरे,

सतरंगी खुशियों से तू सबका मंगल करे,

तू ही है तन में तू ही है मन में तुझको ही हर पल जपु

तेरी शरण में आकर के बाबा तेरा ही वंदन करू,

हे मेरे साई शिरडी के साई मेरा सहारा हो तुम,

तू ही मालिक मेरा जग तेरा वंदन करे,

तू है तो दुनिया से मन मेरा क्यों पर डरे,

तू ही है तन में तू ही है मन में तुझको ही हर पल जपु

तेरी शरण में आकर के बाबा तेरा ही वंदन करू,

हे मेरे साई शिरडी के साई मेरा सहारा हो तुम,

शिरडी की माटी को जो माथे का चन्दन करे,

त्रिभुवन में कुछ भी नहीं तेरी किरपा से परे,

तू ही है तन में तू ही है मन में तुझको ही हर पल जपु

तेरी शरण में आकर के बाबा तेरा ही वंदन करू,

हे मेरे साई शिरडी के साई मेरा सहारा हो तुम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।