हथ दाती दा है सिर ते मैनु फ़िक्र न कोई ऐ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

क्यों डोला मैं गबरावा हथि माँ ने कीतियां छावा,

मैं लख लख शुकर मनावा रेहमत तेरी होइ है,

हथ दाती दा है सिर ते मैनु फ़िक्र न कोई ऐ,

बड़ा कुझ दिता दाती कासे दी न थोड़ है,

भर दे खजाने पूरी किती हर लोड है,

हूँ हर इक सुख हंडावा खुशिया नाल भरियाँ रावा रेहमत तेरी होइ है,

हथ दाती दा है सिर ते मैनु फ़िक्र न कोई ऐ,

उदास जाहे चेहरिया ते रोनका ने आ गियां,

चारे पास खुशिया ही खुशिया ने छा गइयाँ,

सब कीतियां दूर बलावा,

मावा ते हुन्दियां मावा,

रेहमत तेरी होइ है,

हथ दाती दा है सिर ते मैनु फ़िक्र न कोई ऐ,

राजू ग्रेवला ओहदे रंग एही जांदी,

सच्चे एते झूठे नु ओ पल च पछाण दी,

तेरी ज्योत मैं नित जगावा गुण तेरे दातिए गावा रेहमत तेरी होइ है,

हथ दाती दा है सिर ते मैनु फ़िक्र न कोई ऐ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।