मेरी दस लाख दी लॉटरी

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॥ पावन पाठ ॥

साईं दर ते शीश झुकाया मैं तेरी चरनी फूल च्ड़ावा मैं,

साईं बिगड़ी मेरी बना दे,

मेरी दस लाख दी लाटारी साईं खुलवा दे,

तेरे नाम जपन नु साईं कोई ते एसी था हॉवे,

संग मरमर दे दरवाजे ते जय साईं लिखियाँ ना हॉवे,

चन्दन दी चोंकी गई हॉवे साईं दी मूरत पई हॉवे,

साईं बिगड़ी मेरी बना दे,

मेरी दस लाख दी लाटारी साईं खुलवा दे,

भगत द्वारे आवन गे साईं तेरा गुण गावन गे,

सुन के महिमा तेरी बाबा जी नेड़े दुरो चल आवन गे,

पास वाले आ जावन गे पर दूर वाले रह जावन गे,

बस एहियो आस भुजा दे,

मेरी दस लाख दी लाटारी साईं खुलवा दे,

हॉवे नुरानी सोहनी जी ओ लखा पति दी धी हॉवे,

तेरी पूजा करन लई बाबा इक प्यारी न्यारी नुह हॉवे,

भगता दा भेडा पार करी मेरी एहनी गल सवीकार करी बस एहियो गल बना दे,

मेरी दस लाख दी लाटारी साईं खुलवा दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।