माँ के आली रंगा

शेषनारायण "गौतम"
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ के आली रंगा ॥

आली रंगा फुलवा चुने भाई लंगुर...॥

फुलवा के मधुर सुहागे हो माँ sss..

माँ के आली रंगा ....

कुकर बासत निकले भइया लंगुरे..

फुलवा टोरन बर जाये हो माँ॥

सनन सनन पुरवाई चले..

सुरती के लहर जगाये हो माँ॥

कुहके कारी कोयलिया,बोले मीठ बतिया।

भगति रहस छलकाये हो माँ....

महर महर महके बन बागीया..

लंगूर के मन हरसाये हो माँ॥

आली आली फुलवा चुनन लागे..

सगरो झपुलिया भराये हो माँ॥

गैंदा केकती केंवरा ,लाली दसमत मोंगरा।

किसम किसम के रहाये हो माँ....

पंचरंग फुलवा के हार गुथे..

मईया ला लाने पहिराये हो माँ॥

फुलवा के शोभा बढ़ निक लागे..

दाई चरन संग पाये हो माँ॥

आँखी आँखी झूले,गऊतम कइसे भूले।

मोहनी मूरत तोरे भाये हो माँ....

माँ के आली रंगा ॥

आली रंगा फुलवा चुने भाई लंगुर...॥

फुलवा के मधुर सुहागे हो माँ sss..॥

माँ के आली रंगा....

गायक- दिनेश बागबाहरा

संगीतकार-सेवक राम एवं अमर सेन्द्रे

श्री गुरुदेव तारा सिंह चौहान

रचनाकार- शेषनारायण "गौतम"

स्व: रामाधिन उस्ताद सेवा मंडली भीम नगर अश्वनी नगर रायपुर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।