जय हो जय हो जय हो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय हो जय हो जय हो जय होवे दाई तोर,

निमवा तरी बिराजे ते सम्लाई माई मोर,

शीश मुकुट तोरे दम दम दमके,

माथे के टिकली दाई चम चम चमके,

कान के बाली तोरे हवेे बड भारी ,

नाक के नथनी दाई सुग्घर लगे,

मोहनी सुरतिया मन भावे माई तोर॥

निमवा तरी बिराजे ते सम्लाई माई मोर

जय हो जय हो जय हो जय होवे दाई तोर ॥

निमवा तरी बिराजे ते सम्लाई माई मोर

खन्न खन्न खनके तोरे हाथ के कंगना

छम छम बाजे दाई पाव पयजनिया

लाली लाली चुनरी तोरे लाली लुगरा

गले में पहीरे दाई हार लाली फूलवा

सिंह के चड़ होईया मय पाईया लागो तोर॥

निमवा तरी बिराजे ते सम्लाई माई मोर

जय हो जय हो जय हो जय होवे दाई तोर ॥

निमवा तरी बिराजे ते सम्लाई माई मोर

ऊंचा हे मंदिर भवन निराला

अजू बाजू ठाडे हवे तोर रखवाला

जो भी शरण मा आये सुनाये दुःख ला

मां मोर सम्लाई हर थस दुःख ला

महिमा है बड भारी गावत हव महिमा तोर

आशीष देबे माता जस ला गावत राईहो तोर

जय हो जय हो जय हो जय होवे दाई तोर ॥

निमवा तरी बिराजे ते सम्लाई माई मोर

जय होवे माई मोर.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।