चूम कर फाँसी के फंदे को

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

चूम कर फाँसी के फंदे को,

कह गए अमर वाणी,

इंकलाब जिन्दाबाद की,

लिख गए अमर कहानी,

वतन के वास्ते थी

जिनके लहू में आज़ादी वाली रवानी

उस आज़ादी की खातिर

उन्होंने बलिदानी की ठानी

अमर रहे सदा तुम्हारी गाथा

हे वीर अभिमानी

सदियों दोहराई जाएगी

तुम्हारे बलिदानों की कहानी

हँसते हँसते देश की खातिर

दे गए तुम कुर्बानी

भगत सिंह राजगुरु सुखदेव

तुम्हें सौ सौ बार सलामी

इंकलाब जिन्दाबाद की

लिख गए अमर कहानी

चूम कर फाँसी के फंदे को

कह गए अमर वाणी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।