मैली चादर ओढ़ के कैसेद् वार तुम्हारे आऊँ

हरी ॐ शरण
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ,

हे पावन परमेश्वर मेरे,मन ही मन शरमाऊँ ।

मैली चादर ओढ़ के कैसे...

तूने मुझको जग में भेजा निर्मल देकर काया,

आकर के संसार में मैंने इसको दाग लगाया ।

जनम जनम की मैली चादर,कैसे दाग छुड़ाऊं,

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ ॥

निर्मल वाणी पाकर तुझसे नाम ना तेरा गाया,

नैन मूँदकर हे परमेश्वर कभी ना तुझको ध्याया ।

मन-वीणा की तारे टूटी,अब क्या राग सुनाऊँ,

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ ॥

इन पैरों से चलकर तेरे मंदिर कभी ना आया,

जहाँ जहाँ हो पूजा तेरी,कभी ना शीश झुकाया ।

हे हरिहर मई हार के आया,अब क्या हार चढाउँ,

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ ॥

तू है अपरम्पार दयालु सारा जगत संभाले,

जैसा भी हूँ मैं हूँ तेरा अपनी शरण लगाले ।

छोड़ के तेरा द्वारा दाता और कहीं नहीं जाऊं

मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ ॥

एल्बम - प्रेमांजलि पुष्पांजलि

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।