तू ही जाने तू ही जाने तू ही जाने

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॥ पावन पाठ ॥

तू ही जाने तू ही जाने तू ही जाने,

साई तेरी महिमा को तू ही जाने ,

साई तेरा जोगी रूप बेमिसाल है,

बेस तेरा फकीरी का कमाल है,

जिसे चाहे तू करदे माला माल है,

साई का मैं दीवाना साई का मैं दीवाना,

साई सच्चा तेरा दरबार बड़ा प्यारा है,

मेरे दाता साई दीदार तेरा प्यारा है,

करू मैं बंदगी लग्न तेरी मन में लगी है,

मेरे नैनो में साई आप की मूरत वसी है,

दुनिया में तेरा रुतबा भुलंद है,

फिर भी फकीरी तुम को पसंद है,

श्रद्धा सबुरी में ही जीवन है,

साई का मैं दीवाना साई का मैं दीवाना,

सभी भक्तो के मन की बात आप जानते हो,

जो शिरडी धाम आये सभी को आप जानते हो,

तू ही देता दिलाता सब की झोली भरते हो,

जो रोगी द्वार पे आये निरोगी करते हो,

सतगुरु साई की निराली शान है,

बड़ा दया वां बाबा तू महान है,

देख के करिश्मा दुनिया हैरान है,

साई का मैं दीवाना साई का मैं दीवाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।