ना मैं फूल लाया हु ना परशाद लाया हु

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

ना मैं फूल लाया हु ना परशाद लाया हु,

साई बाबा से कहने दिल की बात आया हु

कब रंग अपना मुझपे चढ़ाओगे,

कब अपना दीवाना बनाओ गे,

ये फर्याद लाया हु ये मुराद लाया हु,

साई बाबा से कहने दिल की बात आया हु

जब मैं जियु तो मैं तेरा होक जियु तेरी भक्ति का रस मैं उम्र भर पीयू,

गमो का सताया दुखो का सताया हु,

साई बाबा से कहने दिल की बात आया हु

साई बुंट्टी ओलम्पी की विनती सुन लो,

ये अनाड़ी है ना इसकी गलती गिनो,

खाली हाथ आया हु ना कुछ साथ लाया हु,

साई बाबा से कहने दिल की बात आया हु

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।