झुंझनू की सेठानी निहाल कर सी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

झुंझनू की सेठानी निहाल कर सी,

मांग ले दादी से मालामाल कर सी,

जय दादी की जय दादी की,

जग से जो मांगे जग नट जावे गो,

दादी जी से मांग काम पट जावे गो,

तेरी तकलीफ में ख्याल कर सी,

मांग ले दादी से मालामाल कर सी.....

सुख में जो दादी जी को नाम गावे है,

दुःख में दादी जी झट दौड़ी आवे है,

बुरे वक़्त में माँ समबाल कर सी,

मांग ले दादी से मालामाल कर सी.........

बस थोड़ो मन में तू धीर धार ले,

सूरज इक बार दादी ने पुकार ले,

आज नहीं मैया तो काल कर सी,

मांग ले दादी से मालामाल कर सी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।