सपने में आ जाना मईया

सौरभ मधुकर
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॥ पावन पाठ ॥

अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है

सपने में आ जाना मईया,ये बोल के सोते है

अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है

थोड़ी सी रहत हो

पूरी ये चाहत हो,

सपने में बात करूँ

इतनी सी इजाजत हो

अँखियों की खिड़की को भी

हम टटोल के सोते है

अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है

सपने में आये तू

कहीं आँख ना खुल जाए

बाते करते करते दिन रात निकल जाए

इस दुनिया से हर नाता हम तोड़ के सोते है

अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है

सपना टूटे मेरा,सपने में खो जाऊं

सपने की चाहत में मैं फिर से सो जाऊं

जीवन की सारी इच्छा हम छोड़ के सोते है

अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है

ये प्रेम हमारा मअबूस इतना बढ़ जाए

सपने में आने की तुझे आदत पद जाए

बनवारी इन हांथो को हम जोड़ के सोते है

अपने दिल का दरवाजा हम खोल के सोते है

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।