जो सो गए हैं

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॥ पावन पाठ ॥

जो सो गए हैं कफ़न तिरंगे का ओढ़कर

चले गए हैं इस जहाँ से जो मुँह मोड़ कर

सरपरस्ती वतन की जिनके हाथों में थी -

है नमन उनको हमारा दोनों हाथों को जोड़कर

जो सो गए हैं कफ़न तिरंगे का ओढ़कर

उजड़ा उजड़ा है चमन सब यहाँ विरान है

फूल टूटे हैं - कूचा कूचा सब शमशान है

सूनी पत्थरीली आँखों में होंगें अब सपने कहाँ

चला गया है कोई अपना उन्हें छोड़कर

है नमन उनको हमारा दोनों हाथों को जोड़कर

जो सो गए हैं कफ़न तिरंगे का ओढ़कर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।