हर बार तेरे दर पे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हर बार तेरे दर पे नव गीत सुनाये गे,.

ढांढन वाली सुन ले तेरी महिमा गाये गे,

हर बार तेरे दर पे.........

तुझसे मिलने से हमे रोको गी भला कैसे,

कदमो में लिपट जाये वृक्षों से लटा जैसे,

सपनो में मीठी माँ को हम सामने पायगे,

हर बार तेरे दर पे.......

हो गी तृष्णा पूरी प्यासी इन अखियन की,

माथे से लगा लेंगे धूलि तेरे चरनन की,

चरणमित लेकर माँ हम भव तर जायगे,

हर बार तेरे दर पे

सदियों से सदा हमने तेरी आस लगाई है,

पागल मनवा कहता माँ तुम को भुलाई है,

पा कर के तेरे दर्शन मन को समजाएगे,

हर बार तेरे दर पे

चुन कर वन उपवन से खुशबू की मधुर लइयाँ,

इक हार बनाया है बीती है कई गड़ियां यह पुष्प भजन मला तुझे भेट चढ़ायेगे,

हर बार तेरे दर पे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।