लाखा की चुनड़ी हो जा चाहे करोड़ की

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॥ पावन पाठ ॥

लाखा की चुनड़ी हो जा चाहे करोड़ की,

थारे ओढे बिन मईया के ही को मोल जी,

आइयाँ देखा तो माहने चुनडी फीकी लागे,

थारे ओडा ही पाछे माँ चोखी चोखी लागे,

मनडा की बाता मइया थाणे ही बोल जी,

थारे ओढे बिन मईया के ही को मोल जी,

चुनडी तो चुनडी है चाहे हल्की हो जा बारी,

झूठा मोल लगाने की माँ आदत पड़ गई भारी,

थारे ताहि तो चुनड़ी अनमोल जी,

थारे ओढे बिन मईया के ही को मोल जी,

कोई सोना चांदी देखे कोई हीरा मोती,

माहरी मैया केवल तू है प्रेम भाव की भूखी,

सोनो दरकार ही कोणी माहने कुछ और की,

थारे ओढे बिन मईया के ही को मोल जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।