दाई शीतल शीतल शीतला

गौतम गुरुजी
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तोरे जस ल गावंव वो, महिमा सुनावंव वो,

अंतस भीतरी वो दाई, तोला सोरियाँवव॥

दाई शीतल शीतल शीतल, जगजननी बिमला ,

तोरे जस ल गावंव वो,,,

जईसे लइका लोहरी लेके, मया लपटाए वो,

अंचरा के छईहां पाके, कइसे मुसुकाये वो।

महतारी के तन के गोरस, पेट भर पाये वो,

अंतस के सगरो आसा, छीन म सिराये वो॥

तोरे कतको रूप हे ना, जगजननी बिमला ,

घेरी बेरी जावंव वो, माथ ल नवावंव वो..

अंतस भीतरी वो दाई, तोला सोरियाँवव॥

जुरियाये नर अउ नारी, बइठे तोर दुआरी वो,

निछमल छईहां दे दे, मया दे दुलारी वो।

कतको तोर जस ल गाके, तरगे महतारी वो,

सुनले बिनती ल हमरो, नहकादे पारी वो॥

करौं निसदिन सुमिरन ना, जगजननी बिमला,

पान फूल लावंव वो, चरन म चघावंव वो..

अंतस भीतरी वो दाई, तोला सोरियाँवव॥

आनी बानी जीव जगत म, दाईं गुन गाये वो,

चारो मुड़ा सोर उड़त हे, जय हो महामाये वो॥

बनके गंगा महारानी, जग भर ल तारे वो,

पोथी लिख बाढ़े महिमा, पार नई पाये वो॥

गौतम ल तार देबे ना, जगजननी बिमला ,

बली बली जावंव वो, हिरदे ल जुड़ावंव वो..

अंतस भीतरी वो दाई, तोला सोरियाँवव॥

तोरे जस ल गावंव वो....

गायक - दिवेश साहू (7415990599)

रचनाकार - गौतम गुरुजी

संगीत - सेवक राम यादव

श्री जय माँ चंडी भजन मंडली लाखे नगर गांधीनगर रायपुर (छ. ग)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।