माँ दर पे तेरे मैं आया हु

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ दर पे तेरे मैं आया हु,

खाली झोली लाया हु,

मुझे दर्श दिखा चरणों से लगा,

नहीं करना माँ तुझसे जुदा,

धाम तेरा सब से बड़ा सवाली तेरे दर पे खड़ा,

जम्मू की पहड़ियो में तूने डेरा डाला है,

भवन तेरा महारानी जग से निराला है,

जो भी दर पे आये सारी खुशियां पाए,

सब भक्तो के मन में रूप तेरा वस जाये,

और कहु क्या दाती इसके सिवा,

माँ दर पे तेरे मैं आया हु........

वैष्णो देवी की भक्तो महिमा महान है,

वेद और पुराणों में भी जिसका भखान है,

लाखो को तारा मैं भी तेरा प्यारा मुझको राह दिखाओ कुछ तो माँ बतालाओ,

तेरे दीदार का हु प्यासा बड़ा,

माँ दर पे तेरे आया हु .......

नवरातो का है मैया अज़ाब नजारा है फूलो से सजा भवन छाया उजिहारा है,

देवी देव सब आये पिया तुझे मनाये,

ब्रह्मा विष्णु शिव भी दाती तेरे ही गुण गाये,

मुझ बेसुरे पे भी माँ करदो किरपा,

माँ दर पे तेरे आया हु .......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।