माँ वैष्णो कंजका दे नाल खेले माई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ वैष्णो कंजका दे नाल खेले माई,

लुक छिप जाना मकाई दा दाना,

राजे दी बेटी आई,

माँ वैष्णो कंजका दे नाल खेले माई,

लुकी मिटी खेल देखो मिटी माँ दी आई है,

बन चुनी अखियां ते आवाज माँ ने लाइ है,

लुक छिप जान मकई दा दाना,

राजे दी बेटी आई,

माँ वैष्णो कंजका दे नाल खेले माई,

सते बेहना देखन अइया वैष्णो दे द्वार जी,

चिंतपूर्णी बोल रही ेहो बार बार जी,

लुक छिप जान मकई दा दाना,

राजे दी बेटी आई,

माँ वैष्णो कंजका दे नाल खेले माई,

देव जी दे दर उते झुक्दा ज़माना है,

आस लगाई मैं भी दर संग पाना है,

लुक छिप जान मकई दा दाना,

राजे दी बेटी आई,

माँ वैष्णो कंजका दे नाल खेले माई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।