कश्मीर की वादी में मेरी माँ का द्वारा है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तोहे नूर का जलवा है जन्नत का नजारा है,

कश्मीर की वादी में शेरोवाली का द्वारा है,

तोहे नूर का जलवा है जन्नत का नजारा है,

हर और पहाड़ो ने डाला हुआ गेरा है,

हर जगह बहारो ने फूलो को बिखेरा है,

भगवान ने धरती पर इक स्वर्ग उतारा है,

कश्मीर की वादी में मेरी माँ का द्वारा है,

है केंदर तपसाया का ऋषियों की धरती है,

इस धरती की कुरदत भी आराधना करती है,

कोई पुण्य का सागर है मुकति का दवार है

कश्मीर की वादी में मेरी माँ का द्वारा है,

माँ के इस द्वारे की महिमा ही निराली है,

खाली न कभी आये जाता जो सवाली है,

ममता के सरोवर की अनमोल वो धारा है,

कश्मीर की वादी में मेरी माँ का द्वारा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।