बेगा सा पधारो जी, सभा में म्हारे आओ गणराज

पारंपरिक
श्री गणेश भजन Bhajan Vighneswaray Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

बेगा सा पधारो जी,

सभा में म्हारे आओ गणराज,

थे बेगा पधारो जी ॥

भक्त खड़े था की बाट निहारे,

भक्त खड़े था की बाट निहारे,

भव सागर से क्यों नहीं तारे,

भव सागर से क्यों नहीं तारे,

भव सागर से क्यों नहीं तारे,

देर ना लगाओ जी,

सभा में म्हारे आओ गणराज,

थे बेगा पधारो जी ॥

विघन विनायक रूप तिहारो,

विघन विनायक रूप तिहारो,

मेरे गणपति कष्ट निवारो,

मेरे गणपति कष्ट निवारो,

मेरे गणपति कष्ट निवारो,

हमको तारो ना,

सभा में म्हारे आओ गणराज,

थे बेगा पधारो जी ॥

‘अवि’ की नैया पार लगाओ,

भक्तों की नैया पार लगाओ,

राग पहाड़ी में विनती गायो,

राग पहाड़ी में विनती गायो,

राग पहाड़ी में विनती गायो,

सुर को सम्भालो ना,

सभा में म्हारे आओ गणराज,

थे बेगा पधारो जी ॥

बेगा सा पधारो जी,

सभा में म्हारे आओ गणराज,

॥ दोहा ॥

थे बेगा पधारो जी ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भजन: बेगा सा पधारो जी, सभा में म्हारे आओ गणराज | Bhajan: Bega Sa Padharo Ji Sabha Mein Mhare Aao Ganraj Lyrics Hindi Aur English Main

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।