देखि सुदामा की दीन दसा, करुना करि के करुनानिधि रोये।
पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सों पग धोये॥
बता मेरे यार सुदामा रे, भाई घणे दिना में आया।
बता मेरे यार सुदामा रे, भाई घणे दिना में आया॥
बालक थे जब इकठे पढ़ते, कृष्ण गुरु के धाम।
कदे न भूलूं बचपन का वो सुंदर सा वो काम॥
घणे दिना में आया रे सुदामा, घणे दिना में आया।
बता मेरे यार सुदामा रे, भाई घणे दिना में आया॥
तू बैठ पलंग पे प्यारे, तेरे पाँव दबाऊँगा।
जो भी तू चाहेगा, वही भोग लगाऊँगा॥
भाभी ने जो भेजा चावल, पोटली क्यों छुपावे।
तीन लोक की संपत्ति, दो मुट्ठी में लुटावे॥
बता मेरे यार सुदामा रे, भाई घणे दिना में आया॥
सखा सखा मिले ऐसे जैसे बिछुड़े हंस की डार।
कृष्ण सुदामा प्रेम का, महिमा अपरंपार॥