बारात भोले की

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

नंदी पे चली है बारात भोले की

सबसे अलग है यो बात भोले की

अरे शूकर नाचे शनिचर नाचे

संग में भूत पुशाचर नाचे

देख ले तू गोरां यो ठाठ भोले की

चले हैं शिव जैसे मस्ट मलंगा

गले में सर्प जटा में गंगा

हाथ में डम डम डमरू बाजे

माथे चंदा कितना साजे

आज दिन है भोले का

और रात भोले की

नंदी पे चली……

Santo Ki Vani Lyrics

गोरां नगरी थर थर काँपे

भूत पिशाचर देख झाँके

गले में है नर मुंडों की माला

शोर मचावे अजब निराला

तू जीत है गोरा

तू मात भोले की

नंदी पे चली है……

फेरों पर जब आयी गोरा

शरमाए देखो कैसे भोला

सात फेरे संग लगाके

वर माला ली सर को झुका के

हो गई है गोरां

देखो आज भोले की

नंदी पे चली है……

फूल देखो गगन से बरसे

देवता सब उतरे स्वर्ग से

शिव मिलन की बेला आयी

देने आये सब शिव को बधाई

कलम प्रकाश की और बात भोले की

ख़ुशी गाती है महिमा दिन रात भोले की

नंदी पे चली है……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।