बाँके बिहारी जी का प्रेम - प्रेरक कहानी

पारंपरिक
श्री कृष्ण कथा katha krishna
॥ पावन पाठ ॥

एक बार मैं ट्रेन से आ रहा था, मेरी साथ वाली सीट पे एक वृद्ध औरत बैठी थी जो लगातार रो रही थी...

मैंने बार-बार पूछा मईया क्या हुआ, मईया क्या हुआ?

बड़ी मिन्नतों के बाद मईया ने एक लिफाफा मेरे हाथ मे रख दिया। मैंने लिफाफा खोल कर देखा उसमे चार पेड़े, 200 रूपये और इत्र से सनी एक कपड़े की कातर थी।

मैंने मईया से पूछा, मईया ये क्या है?

मईया बोली मैं वृंदावन बिहारी जी के मंदिर गई थी, मैंने गुल्लक में 200 रूपये डाले और दर्शन के लिऐ आगे बिहारी जी के पास चली गई। वहाँ गोस्वामी जी ने मेरे हाथ मे एक पेड़ा रख दिया, मेने गोस्वामी जी को कहा मुझे दो पेड़े दे दो पर गोस्वामी जी ने मना कर दिया। मैंने उससे गुस्से मे कहा मैंने 200 रूपये डाले है मुझे पेड़े भी दो चाहिए पर गोस्वामी जी नहीं माने। मैंने गुस्से मे वो एक पेड़ा भी उन्हे वापिस दे दिया और बिहारी जी को कोसते हुए बाहर आ कर बैठ गई। मैं जैसे ही बाहर आई तभी एक बालक मेरे पास आया और बोला मईया मेरा प्रसाद पकड़ लो मेने जूते पहनने है। वो मुझे प्रसाद पकड़ा कर खुद जूते पहनने लगा और फिर हाथ धोने चला गया। फिर वो नही आया। मै पागलो की तरह उसका इंतजार करती रही। काफी देर के बाद मैंने उस लिफाफे को खोल कर देखा। उसमें 200 रूपये, चार पेड़े और एक कागज़ पर लिख रखा था ( मईया अपने लाला से नाराज ना होया करो ) ये ही वो लिफाफा है

॥ दोहा ॥

॥ जय श्री राधे ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

प्रेरक कहानी: बाँके बिहारी जी का प्रेम - Prerak Kahani: Banke Bihari Ji Ka Prem

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।