बाँधा था द्रौपदी ने तुम्हे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Ram Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

बाँधा था द्रौपदी ने तुम्हे,

चार तार में ।

खूब जान लिया बाँधा,

एक पुष्प-हार में ॥

बाँधा था द्रौपदी ने तुम्हे,

चार तार में ।

खूब जान लिया बाँधा,

एक पुष्प-हार में ॥

वृंदा ने प्रेम डोर से,

बाँधा था तुम्ही को ।

वृषभानु किशोरी ने,

तुम्हे एक प्यार में ॥

॥ बाँधा था द्रौपदी ने..॥

बाँधा था तुम्हे साग खिला,

भक्त विधुर ने ।

गणिका ने सुना राम,

बड़ों की पुकार में॥

॥ बाँधा था द्रौपदी ने..॥

बाँधा था पवन पुत्र ने,

बूटी के बाण में ।

केवट ने लिया बाँधा,

पद पखार में ॥

॥ बाँधा था द्रौपदी ने..॥

दो अक्षरों के नाम से,

प्रह्लाद ने बाँधा ।

सबरी ने लिया बाँधा,

तुम्हे बैर चार में ॥

॥ बाँधा था द्रौपदी ने..॥

सदना ने रखा प्रेम,

तराजू में पकड़कर ।

किस अधम ने रखा है,

आंशुओं की धार में ॥

॥ बाँधा था द्रौपदी ने..॥

बाँधा था द्रौपदी ने तुम्हे,

चार तार में ।

खूब जान लिया बाँधा,

॥ दोहा ॥

एक पुष्प-हार में ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।