बमलेश्वरी हो माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

बमलेश्वरी हो माँ ।समलेश्वरी हो माँ ल 2

तोर जयहो जयहो जयहो, मोर गांव के बुढही माँ ॥

कोन जनी कबले,तै लगावत हस फेरा,

चारो मुड़ा जग म,तोर सुघर हावे डेरा,

कोन जनी कबले,तै लगावत हस फेरा,

चारो मुड़ा जग म,तोर सुघर हावे डेरा,

दंतेश्वरी हो माँ ।परमेश्वरी हो माँ । 2

तोर जयहो जयहो जयहो, मोर गांव के बुढही माँ ॥

देवी हावव ऐके,फेर मान गउन अलगे,

बूढ़ी महामाई शीतला, इही रूप बरन चलगे,

देवी हावव ऐके,फेर मान गउन अलगे,

बूढ़ी महामाई शीतला, इही रूप बरन चलगे,

संतो की वाणी लिरिक्स

चढ़- राजेश्वरी हो माँ ।विन्देश्वरी हो माँ । 2

तोर जयहो जयहो जयहो, मोर गांव के बुढही माँ ॥

कोनो ठिहा जाबे उहि देवी ला पाबे,

कुल देवी घर के गौतम इही हावे,

कोनो ठिहा जाबे उहि देवी ला पाबे,

कुल देवी घर के गौतम इही हावे,

चढ़ - दुर्गेश्वरी हो माँ ।मातेश्वरी हो माँ । 2

तोर जयहो जयहो जयहो, मोर गांव के बुढही माँ ॥

दुर्गा चालीसा | आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी | आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली | महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् | माता के भजन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।