बालाजी तुम्हारे चरणों में, मैं तुम्हे रिझाने आया हूँ

पारंपरिक
हनुमान जी भजन Bhajan Hanuman Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

बालाजी तुम्हारे चरणों में,

मैं तुम्हे रिझाने आया हूँ ॥

प्रभु का चरणामृत लेने को,

है पास मेरे कोई पात्र नहीं,

प्रभु का चरणामृत लेने को,

है पास मेरे कोई पात्र नहीं,

आँखों के दोनों प्यालों से,

कुछ भीख मांगने आया हूँ,

बाला जी तुम्हारे चरणो में,

मैं तुम्हे रिझाने आया हूँ ॥

तुमसे लेकर क्या भेंट धरूँ,

बालाजी तुम्हारे चरणो में,

तुमसे लेकर क्या भेंट धरूँ,

बालाजी तुम्हारे चरणो में,

मैं सेवक हूँ तुम दाता हो,

संबंध बताने आया हूँ,

बाला जी तुम्हारे चरणो में,

मैं तुम्हे रिझाने आया हूँ ॥

सेवा की कोई वस्तु नहीं,

फिर भी मेरा साहस देखो,

सेवा की कोई वस्तु नहीं,

फिर भी मेरा साहस देखो,

रो रो कर आज आंसुओ का,

मैं हार चढाने आया हूँ,

बाला जी तुम्हारे चरणो में,

मैं तुम्हे रिझाने आया हूँ ॥

बालाजी तुम्हारे चरणों में,

॥ दोहा ॥

मैं तुम्हे रिझाने आया हूँ ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।