बााबा नेने चलियौ हमरो अपन नगरी

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

बााबा नेने चलियौ हमरो अपन नगरी,

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,

अपन नगरी हो झारखण्ड डगरी

बबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी

अँगना बहारब बाबा, घरवा बहारब

अँगना बहारब बाबा, घरवा बहारब

औरो बहारब अहां के डेहरी बाबा

औरो बहारब अहां के डेहरी

बा बा नेने चलियौ हमरो अपन नगरी,

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी

अहां के नगर में बाबा गंगा नहायब

अहां के नगर में बाबा गंगा नहायब

जल भरी आनब भरी गगरी

बाबा जल भरी आनब भरी गगरी

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,

कार्तिक गणपति गोद खिलायब

कार्तिक गणपति गोद खिलायब

पीसब भांग रगड़ी रगड़ी बाबा

पीसब भांग रगड़ी रगड़ी

बाब लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी

सांझ सवेरे बाबा झांकी निहारब

जीवन सफल होयत हमरी

बाबा जीवन सफल होयत हमरी

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,

अपन नगरी हो झारखण्ड डगरी

बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।