बाबा नागपाल

पारंपरिक
माता दुर्गा संत साहित्य Bhakt Baba Nagpal Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल: बाबा नागपाल

अन्य नाम - बाबा संत नागपाल

गुरु - नीम करोली बाबा

आराध्य - माँ कात्यायनी

जन्म स्थान - 3 मार्च, कर्नाटक

मृत्यु - 16 दिसंबर, 1998

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

प्रसिद्धि - आध्यात्मिक नेता

संस्थापक - छत्तरपुर मंदिर

बाबा नागपाल जी भारत में, विशेष रूप से दिल्ली में, एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक व्यक्तित्व और तांत्रिक संत थे। वे एक रहस्यवादी संत के रूप में जाने जाते थे जिन्होंने तांत्रिक और शक्ति परंपराओं का पालन किया और अपना जीवन माँ दुर्गा की पूजा में समर्पित कर दिया।

बाबा नागपाल को प्रसिद्ध छतरपुर मंदिर के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। आधिकारिक तौर पर दक्षिण दिल्ली में स्थित इस मंदिर को श्री आद्य कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह भारत के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक है, जिसका निर्माण 1974 में हुआ था।

बाबा नागपाल को उनके भक्तों द्वारा सिद्ध संत माना जाता था। कई राजनीतिक नेता और हस्तियाँ उनसे आशीर्वाद लेने आते थे। ऐसा माना जाता था कि उनके पास आध्यात्मिक शक्तियां और तंत्र एवं मंत्र साधना का गहरा ज्ञान था।

1998 में उनके निधन के बाद, छतरपुर मंदिर परिसर में उनकी समाधि स्थापित की गई। श्रद्धालु आज भी दर्शन के लिए मंदिर आते हैं। बाबा नागपाल स्वयं मंदिर परिसर के भीतर एक छोटे से कमरे में रहते थे। वे विलासिता से दूर रहते थे और अनुशासित आध्यात्मिक दिनचर्या का पालन करते थे।

हाल की घटना का विवरण:

संत बाबा नागपाल जी की 101वीं जयंती 3 मार्च, 2026 को छतरपुर मंदिर के प्रांगण में अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम से मनाई जा रही है। इस शुभ अवसर पर लाखों श्रद्धालु बाबा जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते हैं।

• सुबह 10:00 बजे – माता की चौकी का उद्घाटन

• प्रस्तुति: बैकस्टेज सिब्लिंग्स द्वारा भव्य भजन संध्या

• दोपहर 2:00 बजे – आरती और माता की चौकी का समापन

• इसके बाद – सभी श्रद्धालुओं के लिए लंगर हॉल में विशेष भंडारा (लंगर) का आयोजन किया जाएगा

सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे बाबा जी का आशीर्वाद प्राप्त करने और इस दिव्य उत्सव का हिस्सा बनने के लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मंदिर परिसर में आएं।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

बाबा नागपाल | Baba Nagpal

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।