बाबा गोरखनाथ आरती

पारंपरिक
श्री राम आरती Aarti Baba Aarti
॥ पावन पाठ ॥

जय गोरख देवा,

जय गोरख देवा ।

कर कृपा मम ऊपर,

नित्य करूँ सेवा ॥

शीश जटा अति सुंदर,

भाल चन्द्र सोहे ।

कानन कुंडल झलकत,

निरखत मन मोहे ॥

गल सेली विच नाग सुशोभित,

तन भस्मी धारी ।

आदि पुरुष योगीश्वर,

संतन हितकारी ॥

नाथ नरंजन आप ही,

घट घट के वासी ।

करत कृपा निज जन पर,

मेटत यम फांसी ॥

रिद्धी सिद्धि चरणों में लोटत,

माया है दासी ।

आप अलख अवधूता,

उतराखंड वासी ॥

अगम अगोचर अकथ,

अरुपी सबसे हो न्यारे ।

योगीजन के आप ही,

सदा हो रखवारे ॥

ब्रह्मा विष्णु तुम्हारा,

निशदिन गुण गावे ।

नारद शारद सुर मिल,

चरनन चित लावे ॥

चारो युग में आप विराजत,

योगी तन धारी ।

सतयुग द्वापर त्रेता,

कलयुग भय टारी ॥

गुरु गोरख नाथ की आरती,

निशदिन जो गावे ।

विनवित बाल त्रिलोकी,

मुक्ति फल पावे ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।