बाट सजेने छि आसन लगेने छी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Mata Ki Chauki Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

बाट सजेने छि। आसन लगेने छी ।

आबु पधारु हे माँ ।

बैसल छी भोरे स। कानै छी ओरे स ।

कोरा उठाबु है माँ ॥

बाट सजेने छी ॥

सबहक बिपदा आहाँ हरै छी ।

हम्मर निवेदन किये नै सुनै छी ।

कोन गल्ती स आहाँ रसल छी ।

देखु न अम्बे हम कतेक कनै छी ।

अहि के पूजलौ अहि स पूछै छी ।

आहाँ छोइर जेबे हम कहाँ ।

बाट सजेने छी ॥

महिमा आहाँ के। केनै जानइये ।

घुइर के आबू माँ बेटा कनइये ।

ममता मई आहाँ पाथर ने बनियो ।

कटते कोना दिन माँ किछु करियो ।

कतेक कनाबै छी किये ने आबै छी ।

निसठुर नै बनियो आहाँ ।

बाट सजेने छी ॥

हम नै मँगे छि भरल बखारी ।

चाही ने हमरा बंगला आ गाड़ी ।

मोन के मंदिर में बॉस करू माँ ।

भक्त क पूरन आस करू माँ ।

रामेंद्र लिखै ये। प्यासा गबइये ।

दरसन देखाबू हे माँ

बाट सजेने छी। आसन लगेने छी ।

॥ दोहा ॥

आबु पधारु हे माँ ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।