अवधेशानंद गिरी जी महाराज

पारंपरिक
श्री राम संत साहित्य Bhakt Swami Avdheshanand Giri Ji Maharaj Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमालः स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज

अन्य नाम - स्वामीजी, आचार्यजी, गुरु महाराज

गुरु - स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि, स्वामी अवधूत प्रकाश महाराज

आराध्य - भगवान शिव

जन्म - 24 नवंबर 1962 (आयु 60 वर्ष)

जन्म स्थान - खुर्जा, बुलंदशहर जिला, उत्तर प्रदेश, भारत

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

पिता - पंडित महावीर प्रसाद शर्मा

भाषा - हिंदी, अंग्रेजी

सुप्रसिद्ध - आध्यात्मिक संत, धर्म वक्ता

पद - अध्यक्ष, हिंदू धर्म आचार्य सभा, जूना पीठाधीश्वर, विश्व धार्मिक नेताओं की परिषद के सदस्य, श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सदस्य

स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज एक आध्यात्मिक संत, लेखक और धार्मिक वक्ता हैं। वे जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर हैं, उन्हें जूना अखाड़ा का प्रथम पुरुष माना जाता है। जूना अखाड़ा भारत में नागा साधुओं का एक बहुत पुराना और बड़ा समूह है। स्वामी अवधेशानंद गिरि ने लगभग दस लाख नागा साधुओं को दीक्षा दी है और वे उनके पहले गुरु हैं। उनका आश्रम हरिद्वार के कनखल में है।

कहा जाता है कि बचपन में स्वामी अवधेशानंद गिरि अक्सर अपने पूर्व जन्म की बात किया करते थे। उन्होंने 17 वर्ष की आयु में सन्यास के लिए घर छोड़ दिया। स्वामीजी ने जलवायु परिवर्तन, विभिन्न संप्रदायों में भाईचारे पर कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों की अध्यक्षता की है और उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नियमित रूप से आमंत्रित भी किया गया है।

स्वामी अवधेशानंद गिरि विभिन्न टीवी चैनलों जैसे संस्कार टीवी और कई प्रमुख कार्यक्रमों के नियमित वक्ता हैं। आचार्यजी अपने व्याख्यानों के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने कई किताबें लिखी हैं और भारतीय आध्यात्मिक दर्शन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से लिखा है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

अवधेशानंद गिरी जी महाराज | Avdheshanand Giri Ji Maharaj

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।