असुर निकंदन भय भंजन कुछ आन करो

संत सूरदास
श्री राम भजन Bhajan Hanuman Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

असुर निकंदन भय भंजन कुछ आन करो

असुर निकंदन भय भंजन कुछ आन करो,

पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो

भीड़ पड़ी अब भारी हे बजरंगबली,

भक्तो के दुःख दूर मेरे हनुमान करो ॥

ग्यारवें हो रूद्र तुम हो, भोले के अवतारी,

ज्ञानियो में आप ज्ञानी योद्धा बलशाली

बाल अवस्था में चंचल आप का था मन,

सूर्य को तुम खा गए नटखट बड़ा बचपन

मैं हूँ निर्बल बल बुद्धि का दान करो,

पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो ॥

श्री राम का तुम सा ना सेवक और है दूजा,

आज घर घर में तुम्हारी हो रही पूजा

दीन दुखिओं की कतारें द्वार पे लम्बी,

आप की महिमा को सुन कर आया हूँ मैं भी

अपने भक्तों का बजरंगी मान करो,

पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो ॥

हे बजरंगी अब दया की कीजिये दृष्टि,

गा रही महिमा तुम्हारी यह सारी सृष्टि

आपकी कृपा हो जिसपे, राम मिले उसको,

बेधड़क आया 'लक्खा' अब और कहूँ किसको

दया की दृष्टि तुम मुझपर बलवान करो,

पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो ॥

असुर निकंदन भय भंजन कुछ आन करो,

पवन तनय संकट मोचन कल्याण करो

भीड़ पड़ी अब भारी हे बजरंगबली,

॥ दोहा ॥

भक्तो के दुःख दूर मेरे हनुमान करो ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।