अरे रे मेरी जान है राधा

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अरे रे मेरी जान है राधा,

तेरे पे क़ुर्बान मैं राधा,

अरे रे मेरी जान हैं राधा,

तेरे पे क़ुर्बान मैं राधा,

रह न सकूंगा तुमसे दूर मैं,

जब भी बने तू राधा श्याम बनूँगा ,

जब भी बने तू सीता राम बनूँगा,

तेरे बिना आधा सुबह शाम कहूँगा,

आत्मा से राधा-राधा नाम कहूँगा ।

अरे रे मेरी जान है राधा,

तेरे पे क़ुर्बान मैं राधा,

रह न सकूंगा तुमसे दूर मैं ॥

सुन्दर नैन विशाल,

मोहनी सूरत प्यारी हैं,

कितनी ग्वालन गोपियाँ,

तू सबसे न्यारी है,

तुम बिन रास रचाऊ कैसे,

जानत सारी है,

श्याम की दिल की रानी,

तू बरसाने वाली है ॥

अरे रे मेरी जान हैं राधा,

तेरे पे क़ुर्बान मैं राधा,

रह न सकूंगा तुमसे दूर मैं ॥

तेरा ही तो नाम पुकारे,

बंसी भोरी री,

गैया भी पहचाने राधा,

महक टोरी री,

तूने किनी नैनन से,

मेरे मन की चोरी री,

कैसी जोड़ी कृष्ण कारा,

राधा गोरी री ॥

अरे रे मेरी जान है राधा,

तेरे पे क़ुर्बान मैं राधा,

रह न सकूंगा तुमसे दूर मैं ॥

हिचकी आये राधा तेरी,

याद सताती है,

यमुना की लहरों में तेरी,

झलक सी आती हैं,

सज धज के सखियों में तू,

पनघट जाती हैं,

सूखी धरती में भी प्रीत के,

कमल खिलाती हैं ॥

अरे रे मेरी जान है राधा,

तेरे पे क़ुर्बान मैं राधा,

रह न सकूंगा तुमसे दूर मैं ॥

जब भी बने तू राधा श्याम बनूँगा ,

जब भी बने तू सीता राम बनूँगा,

तेरे बिना आधा सुबह शाम कहूँगा,

आत्मा से राधा राधा नाम कहूँगा ।

अरे रे मेरी जान है राधा,

तेरे पे क़ुर्बान मैं राधा,

॥ दोहा ॥

रह न सकूंगा तुमसे दूर मैं ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।