अरज सुणो बनवारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Vishnu Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अरज सुणो बनवारी सांवरियां म्हारी,

अरज सुणो बनवारी,

अरज सुनो गिरधारी सांवरिया म्हारी,

अरज सुनो गिरधारी ॥

श्वास श्वास मे थारे सुमीरु दाता,

भूलों मति बनवारी,

भुल गया तो रे,

लाज जावेगी,

हँसी होवेगी घणी थारी,

सांवरियां म्हारी अरज सुणो बनवारी ॥

माया नागणि कियो है कुन्डालो दाता,

ईण ते बेगी उबारो,

मोह माया ने रे,

जाल फसायो,

अब सुध लेवो बनवारी,

सांवरियां म्हारी अरज सुणो बनवारी ॥

मै मतिहीन हूँ कछु नही दाता,

आयो शरण तिहारि,

भवसागर में रे,

घणो दुख पायो,

अब की पार उतारो,

सांवरियां म्हारी अरज सुणो बनवारी ॥

आगे संत अनंत ऊबारया दाता,

अबकी बारी हमारी,

दास मलूक कहे रे,

भूली मति जाजौ,

म्हणे तो भरोसों बड़ो भारी,

सांवरियां म्हारी अरज सुणो बनवारी ॥

अरज सुणो बनवारी सांवरियां म्हारी,

अरज सुणो बनवारी,

अरज सुनो गिरधारी सांवरिया म्हारी,

॥ दोहा ॥

अरज सुनो गिरधारी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।